हर सुबह को उगता सूरज हर शाम को ढलता है
ज़माने का क्या जिक्र करें जमाना रंग बदलता है
तेरे ही प्यार से रोशन है मेरी रूह का कोना कोना
चेहरे पर जिसका नूर है वो दिया तो दिल में जलता है
समंदर सी अथाह होने लगी अब पीड तेरी चाह की
छलक जाता हैं तेरा प्यार अब आँखों में नहीं संभलता है
तेरा चेहरा निगाहों में लेकर मैं रहा सदा तनहा तनहा
मैंने आँखे बंद कर ली अब साथ जमाना चलता है
जिस प्यार को मेरी जानेजां तुम समझी हो मैं भूल गया
वो प्यार गुमनाम ख़ामोशी से आज भी दिल में पलता है
डॉ. विकास तोमर
7 dec 2010
Raj......... ............................aap ki poetry amir khan ki movie ki trh hai bro der se aati hai par durust aati hai sach kahu aap ki shabdo ke samne ahr kisi ki soch fiki pad jati hai9 minutes ago 
• » נソσтι ∂αηg נιη∂gι ∂υѕнмα нσgαι « •तेरा चेहरा निगाहों में लेकर मैं रहा सदा तनहा तनहा
मैंने आँखे बंद कर ली अब साथ जमाना चलता है
जिस प्यार को मेरी जानेजां तुम समझी हो मैं भूल गया
वो प्यार गुमनाम ख़ामोशी से आज भी दिल में पलता है
yeh panktian mujhe bahut achhi lagin
awesome
चक्रेश सिंह ..kuan se sher ko best kahoon is kashmash mein hun..har sher sawa sher,,..behad umda gazal ke liye badhaai Tomar sir3 minutes ago
panktian mujhe bahut achhi lagin
awesomeRead full replyDec 9चक्रेश सिंह ..kuan se sher ko best kahoon is kashmash mein hun..har sher sawa sher,,..behad umda gazal ke liye badhaai Tomar sirDec 9payal- I am a child of jesusvery nice........... vikas jiDec 10***गोविन्द***... "अजीब"डाक्टर साहेब,
लगता है अब दिल के मरीज़ बढ़ जायेंगे,अरे साहेब तेरे ही प्यार से रोशन है मेरी रूह का कोना कोना चेहरे पर जिसका नूर है वो दिया तो दिल में जलता है, क्या खूब लिखा है..सरकार क्या कर रहे हैं..मर जावां मर जावां
मर गया,तेरे नूर पे ये "अजीब"
एक नज़र ही काफी थी जीने के लिएDec 10Read full reply
suman singhक्या बात है डाक्टर साहेब ...कहना पड़ेगा...आपकी चाहत में बड़ी शिद्दत है....बेहद कशिश भरी पीड़ा है...पढ़ के दिल में लहर सी उठ जाती है....
बस आप तो कमाल का लिखते हैं जी...7:12 PM
हर सुबह को उगता सूरज हर शाम को ढलता है
ज़माने का क्या जिक्र करें जमाना रंग बदलता है
bahut umda likha ji aapne
bahut khoobsurat
shukria madhu bahi
समंदर सी अथाह होने लगी अब पीड तेरी चाह की
छलक जाता हैं तेरा प्यार अब आँखों में नहीं संभलता है
तेरा चेहरा निगाहों में लेकर मैं रहा सदा तनहा तनहा
मैंने आँखे बंद कर ली अब साथ जमाना चलता है
जिस प्यार को मेरी जानेजां तुम समझी हो मैं भूल गया
वो प्यार गुमनाम ख़ामोशी से आज भी दिल में पलता है
bilkul sahi likha bhaiya .............
मैंने आँखे बंद कर ली अब साथ जमाना चलता है
har panktiyan dil ko chhuti hui hain.........
gunguna k dekhein .. .
aur nikhaar aayega ..
Behtreen ehsaas hein ..
likhte raho ..
जिस प्यार को मेरी जानेजां तुम समझी हो मैं भूल गया
वो प्यार गुमनाम ख़ामोशी से आज भी दिल में पलता है
bahut khoob tomar sir ... ehsaas hamesha ki tarah shabaab pr hain ... dil ko chhoone waali rachna ... keep sharing
तेरा चेहरा निगाहों में लेकर मैं रहा सदा तनहा तनहा
मैंने आँखे बंद कर ली अब साथ जमाना चलता है
Dr. Saaheb aap ye sab kaise soch lete ho ?
Beautiful!!
lovely poem sir.....
हर सुबह को उगता सूरज हर शाम को ढलता है
ज़माने का क्या जिक्र करें जमाना रंग बदलता है
bahut umdaa, Dr. saab, bahut badhiyaa khyaal. badhai sweekaren
लाजवाब
bahout badiya.
bahut sunder ..:)
aap sabhi doston ka haardik aabhar ..... aap sabhi logo ka prem mujhe aage likhne ke liye prerit karta hai .....
bahut khubh Dr. sahab
kya khubh kaha hai aapne