Friday, February 10, 2012

जिन्दगी






  





लाचारी  है  बेबसी है  या  कोई  इजलाम है शायद
जिन्दगी अपनी ही बुनी उलझनों का जाल है शायद 

घर में ,बाजारों में या महफ़िलों में रहूँ तनहा हूँ मैं  
मेरी चाहत मेरी वफाओं का यही इनाम है शायद 

कोई मेरा होकर मेरा नही ,कोई पराया  भी अपना है  
प्यासे लबों पर मजबूरियों का खाली जाम है शायद  

साथ में साए की तरह ,सांस में खुशबु की तरह रहती है  
तेरे साथ गुजारी हुई कोई अधूरी शाम है शायद 

उसने तो चाहा था "तोमर" हर मरासिम तोड़ देना 
उसके हाथों की लकीरों में कंही मेरा नाम है शायद 

डॉ.विकास तोमर 
1 feb 2012 




ܔܢܜܔRaJu bAuDhIi(๏̯͡๏ Feb 11
Dr Tomar 
uske hathon ki lakeero men kahin mera naam hai shayad ...

aapki aasha aur umeed se bhari panktiyon ka swagat hai ....
rachna ke liye badhayi sweekar karen ...

soul flower Feb 11
haathon ki lakeerein badla bhi karti hai Doc Saab.....
Anilanjana Sinha Feb 12
dr. vikas tomar दिल ए नादाँ तुझे हुआ क्या है:
लाचारी  है  बेबसी है  या  कोई  इजलाम है शायद
जिन्दगी अपनी ही बुनी उलझनों का जाल है शायद 

घर में ,बाजारों में या महफ़िलों में रहूँ तनहा हूँ मैं  
मेरी चाहत मेरी वफाओं का यही इनाम है शायद 

कोई मेरा होकर मेरा नही ,कोई पराया  भी अपना है  
प्यासे लबों पर मजबूरियों का खाली जाम है शायद  

साथ में साए की तरह ,सांस में खुशबु की तरह रहती है  
तेरे साथ गुजारी हुई कोई अधूरी शाम है शायद 

उसने तो चाहा था "तोमर" हर मरासिम तोड़ देना 
उसके हाथों की लकीरों में कंही मेरा नाम है शायद 

डॉ.विकास तोमर 
1 feb 2012
yahi hai zindgi...........
सुख की  अलग अलग  परिभाषा है
चिर  प्रतीक्षित.. वक़्त की सुहासा है...........bahut khoob
RISHI PANDIT ♥ღ♥ NÖt bÊst, but bÊttÊR tHÊn U☞ Feb 14
bahut bahut bhadaiyan Dr. sahab....bahut hi achcha likha hai
sangeeta (minkey) 11:48 AM
कोई मेरा होकर मेरा नही ,कोई पराया भी अपना है
प्यासे लबों पर मजबूरियों का खाली जाम है शाय

what a composition


great writting sir ji