Thursday, April 28, 2011

खोखले झूठे रिश्तों का बोझ मैं उठाऊँ कब तक  
दिल में दर्द का सागर लेकर मुस्कुराऊं कब तक   

हर रात सो जाता हूँ सोचकर कल नया सवेरा होगा 
जहर का हर घूँट यूँ ही पीता जाऊं कब तक  

चाँद तारे फूल शबनम सब तेरी ही याद दिलाते हैं 
कोशिश बहुत करता हूँ मगर तुझको भुलाऊं कब तक  

अपने हाल ए दिल की नुमाइश जरुरी तो नहीं 
ऐ सनम तुझे दीवाना नजर आऊँ कब तक   

हर रोज नयी तम्मना हर रोज नया दिलासा 
ऐ जिन्दगी बता तुझे आजमाऊं कब तक 


रजनीश Rajnish 

Dr. Sab,
behatreem rachna.
bahut badhai aapko
May 1
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dr. vikas tomar 

shukria rajneeesh bhai
May 1
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Ravi jagnani.... 

kamaal hai saahab...........bahut hi badhiyan........aap ki lekhini behtarin hai.......likhte rahiye,taaki khuch hum bhi sikh saken..................
May 2
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dr. vikas tomar 

thanx ravi
May 2
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P Solanki 

हर रोज नयी तम्मना हर रोज नया दिलासा
ऐ जिन्दगी बता तुझे आजमाऊं कब तक................bahut acha likha h
May 2
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Anilanjana 

खोखले झूठे रिश्तों का बोझ मैं उठाऊँ कब तक ....जब तक...आप अपनी भावनाओं को..शब्दों में बांध कर रख सकें तब तक.. पता है विकासकी प्यास अब इन खारे पानी से बुझने..आदत सी बन गयी....है..अगर इंसान बने रहना है तो...हर रोज नयी तम्मना हर रोज नया दिलासा ..जिंदगी को ताजिंदगी.. अजमाने केलिए काफी है..बहुत कुछ कहा अनकहा कह गयी आपकी ये रचना ...
May 2
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कमलेश 

डॉक्टर साहब !
बहुत खूबसूरत !!
जिंदगी के रंगों को आपने बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्‍तुति ।
May 2
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Kapil Kumar 

wah Dr. Shahb...nice lines...

खोखले झूठे रिश्तों का बोझ मैं उठाऊँ कब तक
दिल में दर्द का सागर लेकर मुस्कुराऊं कब तक
May 5
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Saurabh 

bahu hi shandar rachna hai doctor sahab.......dil kush ho gaya..............
May 5
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keshav 

हर रोज नयी तम्मना हर रोज नया दिलासा
ऐ जिन्दगी बता तुझे आजमाऊं कब तक
Wah kya baat hai
K.B. Zinjarde







Chakresh Singh 

अपने हाल ए दिल की नुमाइश जरुरी तो नहीं
ऐ सनम तुझे दीवाना नजर आऊँ कब तक

हर रोज नयी तम्मना हर रोज नया दिलासा
ऐ जिन्दगी बता तुझे आजमाऊं कब तक


wwaah sir!!!!

awesome gazal....hats off
May 10 (4 days ago)
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manjeet 

अपने हाल ए दिल की नुमाइश जरुरी तो नहीं
ऐ सनम तुझे दीवाना नजर आऊँ कब तक


kya khoob kaha tomar bhai ....... dil khush ho gya ..... aise hi badiya badiya likhte rahiye aur hameN padate rahiye
May 13 (1 day ago)
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my 

Doc ji, zindagiko aazmane ki bajay , aap khudko kyu nahi aazmate??


a nice write....