क्या इस तुम्हे तुमसे चुरा सकता हूँ .... सिर्फ एक पल के लिए
जब तुम्हारे गेसू मुझ पर बिखर जायेंगे
ये चाँद तारे जमीं पर उतार आयेंगे
क्या मैं तुम्हे बाहों में उठा सकता हूँ ...... सिर्फ एक पल के लिए
क्या इस जीवन में तुम्हारा साथ पा सकता हूँ ... सिर्फ एक पल के लिए
तुम अपने जीवन का कोई एक पल मुझे दे पाओगी ?
मेरे साथ मेरे ख्यालों के दरिया में बह पाओगी ?
क्या मैं आसमाँ तुम्हारे कदमो में झुका सकता हूँ .... सिर्फ एक पल के लिए
क्या इस जीवन में तुम्हारा साथ पा सकता हूँ ... सिर्फ एक पल के लिए
ख्वाबों का एक बुलबुला हूँ हकीकत नहीं ,जानता हूँ मैं
आज भी तुझे मेरी जरुरत नही, जानता हूँ मैं
क्या मैं रेत के घरोंदे बना सकता हूँ ...... सिर्फ एक पल के लिए
क्या इस जीवन में तुम्हारा साथ पा सकता हूँ ... सिर्फ एक पल के लिए
बेवफा जिन्दगी में कुछ नाकाम हसरतों के पास बैठा हूँ
दो घडी को चली जाओ मैं कितना उदास बैठा हूँ
क्या मैं भी औरों क़ि तरह मुस्कुरा सकता हूँ ....सिर्फ एक पल के लिए
क्या इस जीवन में तुम्हारा साथ पा सकता हूँ ... सिर्फ एक पल के लिए
डॉ. विकास तोमर

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