Sunday, May 10, 2015

तुम जो रूठे हो

तुम जो रूठे हो तो मुझे भी कोई मनाता नहीं है
अब कोई अपना कहकर गले से लगाता नहीं है

हवाओं के चलने से सूखे पत्ते जरूर खडकते हैं
और कोई इन गलियों में आता जाता नहीं है

वक्त की बारिशों मे सब कच्चे रंग धुल गये
अब किसी से मेरा कोई रिश्ता नाता नहीं है

रास्ते जिन्दगी के  बहुत दुश्वार संभल कर चलो तोमर
अब गिरतों को हाथ देकर कोई उठाता नहीं है

Friday, May 8, 2015

मेरे दोस्त

वक्त के परिंदे कछ पल को मेरे हाथों से उड गये थे
नेह के कुछ धागे जो तुमसे जुड गये थे

जो तुमसे किये नही उन वादों के लिये
प्रेम के उन कच्चे से धागों के लिये

ज्यादा नहीं माँगता बस इतना कहना है
करीब या दूर जँहा भी तुम्हे रहना है

अपनी जिंदगी मे खुशियों की फसल उगाते रहना दोस्त
तुम जँहा हो ठीक तो हो बस इतना बताते रहना दोस्त
                                 Tomar 8 may 2015