वक्त के परिंदे कछ पल को मेरे हाथों से उड गये थे
नेह के कुछ धागे जो तुमसे जुड गये थे
जो तुमसे किये नही उन वादों के लिये
प्रेम के उन कच्चे से धागों के लिये
ज्यादा नहीं माँगता बस इतना कहना है
करीब या दूर जँहा भी तुम्हे रहना है
अपनी जिंदगी मे खुशियों की फसल उगाते रहना दोस्त
तुम जँहा हो ठीक तो हो बस इतना बताते रहना दोस्त
Tomar 8 may 2015
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