
किसी के कोमल क़दमों की आहट है
शायद वो मेरे दिल से गुजर रही है
ओ चाँद निकल आ तू अमावस की रात में भी
मेरे दिल की अप्सरा अब आसमा से उतर रही है
उसके मुस्कुराने से खिल उठे हैं फूल गुलशन
उसके गुनगुनाने से कायनात रक्स (नृत्य) कर रही है
वादा किया था उसने आज मेरे खवाबों में आने का
नींद से जाग वो अपने वादे से मुकर रही है
चांदनी रात में बैठा हूँ ताज महल के सामने
जमना के पानी में तस्वीर तेरी उभर रही है
फूलों ख्याल रखना जरा उनके पाऊँ न छिल जाएँ
ऐ हवाओं थम जाओ उनकी जुल्फ बिखर रही है
चाँद सितारे फूल और कलियाँ सब आये हैं देखने
आइना बनी हैं मेरी आँखें वो सज संवर रही है
सुर्ख हो गया है हया से रंग चेहरे का होठ कपकपाते हैं
मेरे आगोश में "तोमर" वो और भी निखर रही है ......
12/28/09 (7 days ago)
वादा किया था उसने आज मेरे खवाबों में आने का
नींद से जाग वो अपने वादे से मुकर रही है
फूलो ख्याल रखना जरा उनके पाऊँ न छिल जाएँ
ऐ हवाओं थम जाओ उनकी जुल्फ बिखर रही है
चाँद सितारे फूल और कलियाँ सब आये हैं देखने
आइना बनी हैं मेरी आँखें वो सज संवर रही है
सुर्ख हो गया है हया से रंग चेहरे का होठ कपकपाते हैं
मेरे आगोश में "तोमर" वो और भी निखर रही है |
nice sir, very sweet poem ..................
she would be very lucky...............
jisko khwabo me dekh kar jiske liye likha hai aapne..............

12/29/09 (6 days ago)
sir ur always fantastic... nice...

12/29/09 (6 days ago)
चाँद सितारे फूल और कलियाँ सब आये हैं देखने
आइना बनी हैं मेरी आँखें वो सज संवर रही है
सुर्ख हो गया है हया से रंग चेहरे का होठ कपकपाते हैं
मेरे आगोश में "तोमर" वो और भी निखर रही है
very nice sir ...... bahut pyari si kavita hai yeh ... ek baat kehna chahti hoon jiada to main bhi nahi jaanti par is kavita mein shuru ki 2 paktiyan kafi chhoti hain jisse balance vigad raha hai ... plzz dont mind main galat bhi ho sakti hoon

12/29/09 (6 days ago)
nice imagination..

12/29/09 (6 days ago)
Presysir... actually it is fantastic.. i read some of ur poems and seem to like them all... i hope u will more write mor