बातें कुछ भूली बिसरी पुरानी लिखता हूँ
आज तेरे प्यार क़ि कहानी लिखता हूँ
तुझे सोचता हूँ तो साँसे महकती हैं मेरी
दिल के खुदा को दिल क़ि जुबानी लिखता हूँ
हम तुम इतने जुदा एक होते भी कैसे
खुद को दीवाना तुझको सयानी लिखता हूँ
तेरी जुल्फों क़ि छाँव में कटती ऐ काश जिन्दगी
कुछ हसरते गुमनाम कुछ जानी पहचानी लिखता हूँ
अपने अधिकार से परे भी तेरे बारे में सोचा ह कई बार
ईमान से आज दिल क़ि सारी बेईमानी लिखता हूँ
आज तेरे प्यार क़ि कहानी लिखता हूँ
15 jan 2011
ipvinder kaur - 9:45 PMbahut khub
अपने अधिकार से परे भी तेरे बारे में सोचा ह कई बार
ईमान से आज दिल क़ि सारी बेईमानी लिखता हूँ
Bahut hi khub likha
soul flower - 10:44 AMईमान से आज दिल क़ि सारी बेईमानी लिखता हूँ
soul flower - Oct 7Subhanallah ! kya likha hai aapne....doc saab !
.....acha likha hai aapne....
Kedar Nath - Oct 17Vikash ji,
Bahut sunder kaha aapne....badhai swikarein ji
→Ħ@r!§Ħ bĦ@┼┼←웃 - Oct 2अपने अधिकार से परे भी तेरे बारे में सोचा ह कई बार
ईमान से आज दिल क़ि सारी बेईमानी लिखता हूँ
BAHUT KHOOB DR. SAHAB
BADHAI APKO OR SWAGAT IS FORAM PAR
आलोकिता * - Oct 16Really nice
enjoyed reading it