Sunday, January 28, 2018

मेरे जख्मों मुस्कुराओ कि ग़ज़ल होगी
मेरी जान कागज पे उतर आओ कि ग़ज़ल होगी

है गजब ये हथेली पे सूरज तो तुमने थामा है
ए रात उसकी आंखों में संवर जाओ कि ग़ज़ल होगी

तुम मेरे न सही तुम्हारा तस्सवुर तो मेरा ही  है
मेरे खयालो से ही गुजर जाओ की ग़ज़ल होगी

दर्द भी ज़रूरी है कि अशआर आंखों से उतार आआये
अब तुम अपने वादे से मुकर जाओ कि ग़ज़ल होगी

TOMAR

Wednesday, December 23, 2015

कुछ ख्वाहिशे अधूरी रह गयी हादसे यूँ गुजर गये
तुझे खबर भी न हुई हम तुझपे चुपचाप मर गये

वक्त की आँधियो में कई बार यूँ हुआ
पन्ने मेरे पास रह गये अल्फाज बिखर गये


न जाने खोट मुझमे था कि तुझमें ए जमाने
बाहर का रास्ता दिखा दिया हम जिसके भी घर गये



मै तो तेरे काबिल न था न कल न आज
मेहरबानियों का शुक्रिया जो तुम मेरे दिल मे उतर गये

Thursday, October 15, 2015

मुझे डर है कहीं मैं अपने दायरे न भुला दूँ .... तुम इतना क्यूँ याद आते हो 
                      TOMAR

Saturday, October 10, 2015

अपने जमीर को न जिन्दा कर सका .... यूँ तो कईं बार मैने मारा खुद को

 चाहकर भी मेरी सूरत न बदली .. कईं आईनों में मैनें उतारा खुद को

तेरी नजर मुझ पर मेहरबाँ न हुई.. सौ बार बिगाडा सौ बार सँवारा खुद को
      Dr. Tomar 12 sept 2015
जिन्दगी कहाँ लेके जायेगी कोई जानता नहीं
क्या करूँ अब मेरे पास अपना कोई रास्ता नहीं

न जाने कितने हाथों से गुजरा अखबार की तरह
कोई हमसफर नहीं मेरा कोई राजदाँ नहीं

हजारों जाने पहचाने चेहरे हैं लाखों की भीड में
जिससे दिल की बात कह दूँ कोई ऐसा आशना नहीं

कहाँ छुपा के रखूँगा अपने गुनाहों की गठरी मैं
मेरे खुदा मुझे बता तू रहता कहाँ कहाँ नहीं

आज फिर किसी ने दिल दुखाया तो कुछ शब्द लिख बैठा
वरना कलम से अब मेरा कहीं कोई वास्ता नहीं

तोमर 30 aug 2015

Friday, October 9, 2015

जिस तरफ भी देखता हूँ 
जिस्म ही जिस्म हैं 
आत्मायें  तो मर चुकी है

सुनते आये हैं शरीर मर जाता है ...आत्मा अमर है 

                ..      TOMAR
कभी ज्यादा होगा कभी थोडा कम होगा 
मुस्कुराते चेहरे के पीछे अक्सर कोई गम होगा 

तुझसे बिछडकर जिन्दा भी हूँ खुश भी हूँ
हकीकत नही है  तेरे मन का वहम होगा

कभी तो मिलोगे जिन्दगी के उस पार ही सही 
 साँसो की डोर टूटेगी कभी तो तो अगला जनम होगा

Tomar 7 oct 2015