मेरे जख्मों मुस्कुराओ कि ग़ज़ल होगी
मेरी जान कागज पे उतर आओ कि ग़ज़ल होगी
है गजब ये हथेली पे सूरज तो तुमने थामा है
ए रात उसकी आंखों में संवर जाओ कि ग़ज़ल होगी
तुम मेरे न सही तुम्हारा तस्सवुर तो मेरा ही है
मेरे खयालो से ही गुजर जाओ की ग़ज़ल होगी
दर्द भी ज़रूरी है कि अशआर आंखों से उतार आआये
अब तुम अपने वादे से मुकर जाओ कि ग़ज़ल होगी
TOMAR
मेरी जान कागज पे उतर आओ कि ग़ज़ल होगी
है गजब ये हथेली पे सूरज तो तुमने थामा है
ए रात उसकी आंखों में संवर जाओ कि ग़ज़ल होगी
तुम मेरे न सही तुम्हारा तस्सवुर तो मेरा ही है
मेरे खयालो से ही गुजर जाओ की ग़ज़ल होगी
दर्द भी ज़रूरी है कि अशआर आंखों से उतार आआये
अब तुम अपने वादे से मुकर जाओ कि ग़ज़ल होगी
TOMAR
.jpg)