कुछ ख्वाहिशे अधूरी रह गयी हादसे यूँ गुजर गये
तुझे खबर भी न हुई हम तुझपे चुपचाप मर गये
वक्त की आँधियो में कई बार यूँ हुआ
पन्ने मेरे पास रह गये अल्फाज बिखर गये
न जाने खोट मुझमे था कि तुझमें ए जमाने
बाहर का रास्ता दिखा दिया हम जिसके भी घर गये
मै तो तेरे काबिल न था न कल न आज
मेहरबानियों का शुक्रिया जो तुम मेरे दिल मे उतर गये
तुझे खबर भी न हुई हम तुझपे चुपचाप मर गये
वक्त की आँधियो में कई बार यूँ हुआ
पन्ने मेरे पास रह गये अल्फाज बिखर गये
न जाने खोट मुझमे था कि तुझमें ए जमाने
बाहर का रास्ता दिखा दिया हम जिसके भी घर गये
मै तो तेरे काबिल न था न कल न आज
मेहरबानियों का शुक्रिया जो तुम मेरे दिल मे उतर गये
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