Sunday, January 28, 2018

मेरे जख्मों मुस्कुराओ कि ग़ज़ल होगी
मेरी जान कागज पे उतर आओ कि ग़ज़ल होगी

है गजब ये हथेली पे सूरज तो तुमने थामा है
ए रात उसकी आंखों में संवर जाओ कि ग़ज़ल होगी

तुम मेरे न सही तुम्हारा तस्सवुर तो मेरा ही  है
मेरे खयालो से ही गुजर जाओ की ग़ज़ल होगी

दर्द भी ज़रूरी है कि अशआर आंखों से उतार आआये
अब तुम अपने वादे से मुकर जाओ कि ग़ज़ल होगी

TOMAR

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