जिन्दगी कहाँ लेके जायेगी कोई जानता नहीं
क्या करूँ अब मेरे पास अपना कोई रास्ता नहीं
न जाने कितने हाथों से गुजरा अखबार की तरह
कोई हमसफर नहीं मेरा कोई राजदाँ नहीं
हजारों जाने पहचाने चेहरे हैं लाखों की भीड में
जिससे दिल की बात कह दूँ कोई ऐसा आशना नहीं
कहाँ छुपा के रखूँगा अपने गुनाहों की गठरी मैं
मेरे खुदा मुझे बता तू रहता कहाँ कहाँ नहीं
आज फिर किसी ने दिल दुखाया तो कुछ शब्द लिख बैठा
वरना कलम से अब मेरा कहीं कोई वास्ता नहीं
तोमर 30 aug 2015
क्या करूँ अब मेरे पास अपना कोई रास्ता नहीं
न जाने कितने हाथों से गुजरा अखबार की तरह
कोई हमसफर नहीं मेरा कोई राजदाँ नहीं
हजारों जाने पहचाने चेहरे हैं लाखों की भीड में
जिससे दिल की बात कह दूँ कोई ऐसा आशना नहीं
कहाँ छुपा के रखूँगा अपने गुनाहों की गठरी मैं
मेरे खुदा मुझे बता तू रहता कहाँ कहाँ नहीं
आज फिर किसी ने दिल दुखाया तो कुछ शब्द लिख बैठा
वरना कलम से अब मेरा कहीं कोई वास्ता नहीं
तोमर 30 aug 2015
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