Saturday, October 10, 2015

अपने जमीर को न जिन्दा कर सका .... यूँ तो कईं बार मैने मारा खुद को

 चाहकर भी मेरी सूरत न बदली .. कईं आईनों में मैनें उतारा खुद को

तेरी नजर मुझ पर मेहरबाँ न हुई.. सौ बार बिगाडा सौ बार सँवारा खुद को
      Dr. Tomar 12 sept 2015

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