खोखले झूठे रिश्तों का बोझ मैं उठाऊँ कब तक
दिल में दर्द का सागर लेकर मुस्कुराऊं कब तक
हर रात सो जाता हूँ सोचकर कल नया सवेरा होगा
जहर का हर घूँट यूँ ही पीता जाऊं कब तक
चाँद तारे फूल शबनम सब तेरी ही याद दिलाते हैं
कोशिश बहुत करता हूँ मगर तुझको भुलाऊं कब तक
अपने हाल ए दिल की नुमाइश जरुरी तो नहीं
ऐ सनम तुझे दीवाना नजर आऊँ कब तक
हर रोज नयी तम्मना हर रोज नया दिलासा
ऐ जिन्दगी बता तुझे आजमाऊं कब तक
Dr. Sab,
behatreem rachna.
bahut badhai aapko
shukria rajneeesh bhai
kamaal hai saahab...........bahut hi badhiyan........aap ki lekhini behtarin hai.......likhte rahiye,taaki khuch hum bhi sikh saken..................
thanx ravi
हर रोज नयी तम्मना हर रोज नया दिलासा
ऐ जिन्दगी बता तुझे आजमाऊं कब तक................bahut acha likha h
खोखले झूठे रिश्तों का बोझ मैं उठाऊँ कब तक ....जब तक...आप अपनी भावनाओं को..शब्दों में बांध कर रख सकें तब तक.. पता है विकासकी प्यास अब इन खारे पानी से बुझने..आदत सी बन गयी....है..अगर इंसान बने रहना है तो...हर रोज नयी तम्मना हर रोज नया दिलासा ..जिंदगी को ताजिंदगी.. अजमाने केलिए काफी है..बहुत कुछ कहा अनकहा कह गयी आपकी ये रचना ...
डॉक्टर साहब !
बहुत खूबसूरत !!
जिंदगी के रंगों को आपने बहुत ही सुन्दर शब्दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्तुति ।
wah Dr. Shahb...nice lines...खोखले झूठे रिश्तों का बोझ मैं उठाऊँ कब तक
दिल में दर्द का सागर लेकर मुस्कुराऊं कब तक
bahu hi shandar rachna hai doctor sahab.......dil kush ho gaya..............
हर रोज नयी तम्मना हर रोज नया दिलासा
ऐ जिन्दगी बता तुझे आजमाऊं कब तक
Wah kya baat hai
K.B. Zinjarde
अपने हाल ए दिल की नुमाइश जरुरी तो नहीं
ऐ सनम तुझे दीवाना नजर आऊँ कब तक
हर रोज नयी तम्मना हर रोज नया दिलासा
ऐ जिन्दगी बता तुझे आजमाऊं कब तक
wwaah sir!!!!
awesome gazal....hats off
अपने हाल ए दिल की नुमाइश जरुरी तो नहीं
ऐ सनम तुझे दीवाना नजर आऊँ कब तक
kya khoob kaha tomar bhai ....... dil khush ho gya ..... aise hi badiya badiya likhte rahiye aur hameN padate rahiye
Doc ji, zindagiko aazmane ki bajay , aap khudko kyu nahi aazmate??
a nice write.... | |
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