दिल जो चाहता है उसे बस वही कर जाने दो
मेरे काँधे से शराफत का ये बोझ उतर जाने दो
जीते जी मेरे खुदा मैं तुम्हे कभी छू न पाऊंगा
सिर्फ इतना करो मुझे अपने आगोश में मर जाने दो
ज़माने की बंदिश रिवाजों के बंधन तोड़ दो
अपनी बांहों में बस एक रात गुजर जाने दो
तुमसे मिले हैं बरसों के बाद अब तो गले लगा लो
आँखे मूँद लो और वक़्त को यहीं ठहर जाने दो
जाने कैसी सूरत है मेरी हर आइना ठुकराता है
ऐ सनम मुझे अपनी आँखों में सँवर जाने दो
डॉ. विकास तोमर
17 may 2011

Superbbbb Dear..........Superbbbbbb....
दिल जो चाहता है उसे बस वही कर जाने दो
मेरे काँधे से शराफत का ये बोझ उतर जाने दो
जीते जी मेरे खुदा मैं तुम्हे कभी छू न पाऊंगा
सिर्फ इतना करो मुझे अपने आगोश में मर जाने दो
ज़माने की बंदिश रिवाजों के बंधन तोड़ दो
अपनी बांहों में बस एक रात गुजर जाने दो
तुमसे मिले हैं बरसों के बाद अब तो गले लगा लो
आँखे मूँद लो और वक़्त को यहीं ठहर जाने दो
जाने कैसी सूरत है मेरी हर आइना ठुकराता है
ऐ सनम मुझे अपनी आँखों में सँवर जाने दो
May 21 (4 days ago)

dr vikas ji aapka swagat hai is sabha pe
ek behtreen gazal likhi aapne
shubhkamnayen
May 24 (1 day ago)

bahut sun

kya baat hai dr. saahab..............bahut badhiyan........ek aur behtarin kavita aapki kalam se

wah....
bahut khub.

Dr. sahab maza aa gaya...
bahut achche Dr. sahab...

DOC ji
sharafat ka bojh aap kabhi nahi utar payenge...
suman singh क्या खूब कह डाला विकास....
''सिर्फ इतना करो.,, मुझे.... अपने आगोश में मर जाने दो ''.......
मार्मिक............ May 23 तोता ****** जाने कैसी सूरत है मेरी हर आइना ठुकराता है
ऐ सनम मुझे अपनी आँखों में सँवर जाने दो
.......bahut sunder tomar ji...good night May 23 vishu - its time ... जीते जी मेरे खुदा मैं तुम्हे कभी छू न पाऊंगा
सिर्फ इतना करो मुझे अपने आगोश में मर जाने दो
ज़माने की बंदिश रिवाजों के बंधन तोड़ दो
अपनी बांहों में बस एक रात गुजर जाने दो
...mere paas shabd nahii hai taarif ke.. Read full reply4:00 PM
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