Sunday, January 3, 2010


न जाने ये कैसा प्यार किया हमने उम्र सारी कटी .... .
कभी न उनसे इकरार किया हमने॥ ।


न उसे आना था न आया न आएगा कभी...
दीवाने थे तेरा ऐतबार किया हमने ... ।


जी रहे थे अब तक तेरी तस्वीर देखकर.... ..
छोड़ चले है दुनिया ये कर्ज उतार दिया हमने । ...


यकीन मुझे न था पर, तुने वादा तो किया था॥ ।
वक्त न था मेरे पास .. .
जिन्दगी से कुछ साँसों को उधर लिया हमने। ॥


मेरी आँखों में देखकर कोई तुजे पहचान न ले....
रुसवा न हो तू इसलिए तुजे दिल में उतार लिया हमने ॥

जहाँ तू बिछड़ा था, लौट कर कर उस मोड़ पर कभी तो आएगा ...

तेरी एक झलक कि ख्वाहिश में सारा जीवन गुजर दिया हमने ॥ ..

डॉ विकास तोमर....

....

1:24 pm (5 hours ago)

Rajni Nayyar

जहा तू बिछड़ा था, लौट कर कर उस मोड़ पर कभी तो आएगा
तेरी एक झलक कि ख्वाहिश में सारा जीवन गुजर दिया हमने

very touchy lines sir...................

sari nazam utarne wali hai................
6:18 pm (37 minutes ago)
delete

invisible dr vikas tomar

shukriya rajni g
...
10:54 pm (14 hours ago)

VISHU~ A bike

beautiful.... true emotions!
10:36 am (2½ hours ago)
delete

dr vikas tomar

thanx for ur comments gurpreet......i'll try to improve
10:57 am (2 hours ago)

•▬●๋• ♥lừćký♥●

dr. sir kafi behtrain kafi pasand aayi...
12:52 pm (35 minutes ago)

kritika

जहा तू बिछड़ा था, लौट कर कर उस मोड़ पर कभी तो आएगा
तेरी एक झलक कि ख्वाहिश में सारा जीवन गुजर दिया हमने
kya lyrics h tomer ji very nice
1:15 pm (11 minutes ago)
delete

dr vikas tomar

thanxx vishu....aapke hosla afzaai ki bahaut jaroorat hai

1:55 pm (4 hours ago)

manjeet

bahut sunder bhaav diye hain aapne sir, aisi poetry aksar dil ke kareeb hoti hai ... shabd achhe use kiye par buntar mein kuchh kami lagi ek chhoti si koshish ki hai thik karne ki ..... kuchh galti hui ho to kshama chahti hoon

तेरी एक झलक कि ख्वाहिश में

न जाने यह कैसा प्यार किया हमने
उम्र कटी सारी न इकरार किया हमने

न आना था उसे न आया न आएगा
दीवाने थे हम तेरा ऐतबार किया हमने

जी रहे थे अब तक तेरी तस्वीर देखकर
छोड़ कर दुनिया कर्ज उतार दिया हमने

यकीन मुझे न था पर वादा था तेरा, तो
जिन्दगी से कुछ सांसें उधार लिया हमने

मेरी आँखों में देख कोई तुझे पहचाने ना
तू रुसवा न हो, दिल में उतार लिया हमने

जहा तू बिछड़ा था, वहां लौट आएगा कभी
एक झलक पाने को जीवन गुजार दिया हमने

डॉ विकास तोमर....

wese aapki last lines bhi bahut achhi hain unko adhar banakar bhi buntar aur rhytham behter ki ja sakti hai

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