
किसी ने चाहा था लड़कपन में तुमको
तुम्हे तो शायद अब याद भी न हो
मन ही मन अपना बनाया था तुमको
तुम्हे तो शायद अब याद भी न हो
उसे न आता था प्यार जताना
उसे न आता था तुमको मनाना
इसलिए शायद सताया था तुमको
तुम्हे तो शायद अब याद भी न हो
दिल ही दिल में अपने ख्वाब बुनता था
सपनो को कलियाँ तेरे लिए चुनता था
कभी न लेकिन बताया था तुमको
तुम्हे तो शायद अब याद भी न हो
रातों को उठकर बिस्तर से जागता था
वो तुम्हे चाहता था तुम्हे मांगता था
दुनिया से रूठकर भी मनाया था तुमको
तुम्हे तो शायद याद भी न हो
सोचता था क्या होगा अंजाम मेरा
कोपियों पे लिखता था वो नाम तेरा
किताबों मेंफूल सा सजाया था तुमको
तुम्हे तो शायद अब याद भी न हो
पीछे कि सीट से क्लास में बैठकर
प्यार से वो तुमको देखता था अक्सर
चाहा मगर गले से लगा न पाया तुमको
तुम्हे तो शायद अब याद भी न हो
बचपन कि वो यादें अब भी आती है
बैचैन करती हैं मुजको रुलाती हैं
सोचा बहत ''तोमर'' भुला न पाया तुमको
तुम्हे तो शायद अब याद भी न हो....
तुम्हे तो शायद अब याद भी न हो...
तुम्हे तो शायद अब याद भी न हो...
डॉ. विकास तोमर.
Jan 14 (21 hours ago)
Rajni Nayyar
दिल ही दिल में अपने ख्वाब बुनता था
सपनो को कलियाँ तेरे लिए चुनता था
कभी न लेकिन बताया था तुमको
तुम्हे तो शायद अब याद भी न हो
tomar ji dil se likhi hai aapne ye aawaz jarur waha tak jayegi.........
jarur yaad sab kuchh aa jayega kisi ko.......
सपनो को कलियाँ तेरे लिए चुनता था
कभी न लेकिन बताया था तुमको
तुम्हे तो शायद अब याद भी न हो
tomar ji dil se likhi hai aapne ye aawaz jarur waha tak jayegi.........
jarur yaad sab kuchh aa jayega kisi ko.......
·ï¡Gøvîñð शर्मा
इतना प्यार... बहुत खूब डॉक्टर साहब... अब आपको मैं दिल का डॉक्टर कहूँगा... नहीं - नहीं दिल का डॉक्टर नहीं ...दिल का मरीज़ यानि प्रेम रोग... बहुत खूब...
गोविन्द शर्मा, जमशेदपुर
गोविन्द शर्मा, जमशेदपुर
.jpg)
बहुत सुन्दर !!! बिलकुल मेरे से मेल खाती कविता है जब में कक्षा ५ का विद्यार्थी था !!!कुछ ऐसे ही किस्से याद आ रहे हैं !अब पता नहीं कहाँ होगी वो!!!!
ReplyDelete