Friday, January 15, 2010


सागर में जैसे मोती हैं , तितली के रंग सुनहरे हैं
ये रिश्ते मन के रिश्ते हैं , ये रिश्ते बड़े ही गहरे हैं

में जब चाहूँ जहा चाहूँ, में तेरे पास होता हूँ
तन है मेरा बंदिश में, आत्मा पे किसके पहरे हैं

दुनिया कि भीड़ में न खो जाना बचपन के साथी
प्यार का रंग हल्का है , ज़माने के रंग रुपहले हैं

ये रंगीनिया जवानियाँ नहीं मुझको लुभाती अब
मेरी बांहों में जिस दिन से तेरी यादों के घेरे हैं

मुझे तेरी जरूरत है गिरुं तो थाम लेना तुम
मेरे अपने नहीं अपने सारी दुनिया मुह फेरे हैं

कभी तो प्यार आएगा वो आँखें कभी तो नाम होंगी
तू गम करना न मेरे दिल हर शब् के सवेरे हैं

संभल कर चल तू ऐ'' तोमर'' शीशे का है दिल तेरा
ये दुनिया पत्थरों कि है यहाँ चेहरों पे चेहरे हैं

डॉ विकास तोमर.....



11:52 am (43 minutes ago)

manjeet

सागर में जैसे मोती हैं , तितली के रंग सुनहरे हैं
ये रिश्ते मन के रिश्ते हैं , ये रिश्ते बड़े ही गहरे हैं

-waah

में जब चाहूँ जहा चाहूँ, में तेरे पास होता हूँ
तन है मेरा बंदिश में, आत्मा पे किसके पहरे हैं

-amazing

दुनिया कि भीड़ में न खो जाना बचपन के साथी
प्यार का रंग हल्का है , ज़माने के रंग रुपहले हैं

- m speachless

ये रंगीनिया जवानियाँ नहीं मुझको लुभाती अब
मेरी बांहों में जिस दिन से तेरी यादों के घेरे हैं

-hmmm good... 2nd line mein kuchh kami si lag rahi hai

मुझे तेरी जरूरत है गिरुं तो थाम लेना तुम
मेरे अपने नहीं अपने सारी दुनिया मुह फेरे हैं

- very nice दुनिया ne मुह फेरे हैं (aise jiada sahi nahi lagta kya?)

कभी तो प्यार आएगा वो आँखें कभी तो नाम होंगी
तू गम करना न मेरे दिल हर शब् के सवेरे हैं

- bahut khoob

संभल कर चल तू ऐ'' तोमर'' शीशे का है दिल तेरा
ये दुनिया पत्थरों कि है यहाँ चेहरों पे चेहरे हैं

kya baat hai .. bahut sunder rachna tomar sir ..... aage bhi yun hi behterin rachnayein dete rahein .....


Jan 16 (2 days ago)

Kahe ko byahi

संभल कर चल तू ऐ'' तोमर'' शीशे का है दिल तेरा
ये दुनिया पत्थरों कि है यहाँ चेहरों पे चेहरे हैं


gazab !!!
Jan 16 (2 days ago)

Rajni Nayyar

सागर में जैसे मोती हैं , तितली के रंग सुनहरे हैं
ये रिश्ते मन के रिश्ते हैं , ये रिश्ते बड़े ही गहरे हैं

में जब चाहूँ जहा चाहूँ, में तेरे पास होता हूँ
तन है मेरा बंदिश में, आत्मा पे किसके पहरे हैं


मुझे तेरी जरूरत है गिरुं तो थाम लेना तुम
मेरे अपने नहीं अपने सारी दुनिया मुह फेरे हैं


संभल कर चल तू ऐ'' तोमर'' शीशे का है दिल तेरा
ये दुनिया पत्थरों कि है यहाँ चेहरों पे चेहरे हैं

big bro. bahut hi chhuti hui nazam likha hai aapne...........

Jan 16 (2 days ago)

Gurpreet Maan...

wah !!!
Jan 16 (2 days ago)

Renu

मुझे तेरी जरूरत है गिरुं तो थाम लेना तुम
मेरे अपने नहीं अपने सारी दुनिया मुह फेरे हैं

khoob hai
Jan 16 (2 days ago)

Dharmendra

vah kya khoob Dr Sahab..
Jan 16 (2 days ago)
delete

invisible dr vikas tomar

thanxx dharam g renug.....maan saab jab tak jeo na kahe maja nahi aata

11:33 am (1 hour ago)

Rajnish

दुनिया कि भीड़ में न खो जाना बचपन के साथी
प्यार का रंग हल्का है , ज़माने के रंग रुपहले हैं

ये रंगीनिया जवानियाँ नहीं मुझको लुभाती अब
मेरी बांहों में जिस दिन से तेरी यादों के घेरे हैं

dr. sahab. lajwav. bahut khoob.

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