Monday, April 8, 2013



तेरे लिए दिल -ओ दिमाग  का लड़ना   ...पहले भी था , आज भी है 
देखकर  तुझे  धडकनों का बढ़ना ......पहले भी था , आज भी है 

दीदार  को तेरे राहों में घंटों खड़े रहना  रहना .......................
देखकर फिर  तुझे  नजरे बचाकर निकलना ...पहले भी था , आज भी है 

फूलों से बदन की  तमन्ना करना और घुट के रह जाना
औरों को तेरे करीब देख दिल ही दिल में जलना ....पहले भी था , आज भी है 

अक्सर ख्वाबों में तेरा आना और सारी  रात साथ रहना  
फिर सुबह उठकर मेरा बच्चों की तरह मचलना .....पहले भी था , आज भी है

न जाने कितने जनम लिए मैंने तेरे लिए "तोमर"
जिन्दगी से परे ही कंही मिल जाओ ,हर घडी हर वक्त भटकना ....पहले भी था , आज भी है


डॉ . विकास तोमर 
8 april 2013 




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