Monday, March 22, 2010


रात यूँ गुजारी शम्मे जलाता रहा बुझाता रहा
तुझे भूलने क़ि कोशिश की तू और याद आता रहा

तन झुलस रहा था मेरा मन झुलस रहा था उसमे
दबी हुई एक आग थी बरसो जिसे बुझाता रहा

उसमे और मुझमे जाने क्यूँ एक जिद सी लगी थी
मैं दामन से उलझता और वो दामन अपना बचाता रहा

उसकी दीद की उम्मीद में खड़ा रहा रास्तों पे मैं
जब वो आया सामने नजरे उसी से चुराता रहा

ढूँढता कैसे उसे मेरी नजर के भी दायरे थे कुछ
जाने किस धुन में था वो दूर बहुत जाता रहा

पुराने रिस्तो की जमीन पर हक दोनों ने अदा किया
वो बेरुखी के बीज बोता मैं प्यार की फसल उगाता रहा

लगी थी शर्त उससे हदें पार करने की " तोमर "
वो था की चोट करता रहा मैं था की जख्म खाता रहा

डॉ विकास तोमर
22 jan 2010

Mar 22 (4 days ago)
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Vinkal

रात यूँ गुजारी शम्मे जलाता रहा बुझाता रहा
तुझे भूलने क़ि कोशिश की तू और याद आता रहा

bahut khoob.......
Mar 22 (4 days ago)
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Dileep

पुराने रिस्तो की जमीन पर हक दोनों ने अदा किया
वो बेरुखी के बीज बोता मैं प्यार की फसल उगाता रहा
ye panktiyan dil ko chhoo gayi.....ye dil bhi kambakht tootta hai to kagaz pe to keher hi dha deta hai...
Mar 22 (4 days ago)
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RAVI

Good one sir....................

वो बेरुखी के बीज बोता मैं प्यार की फसल उगाता रहा

लगी थी शर्त उससे हदें पार करने की " तोमर "
वो था की चोट करता रहा मैं था की जख्म खता रहा

Nice line sir.........................

Mar 23 (3 days ago)
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Dharmendra

KYA KHOOB HAI ..DR SAHAB
Mar 24 (2 days ago)
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invisible डॉ. विकास तोमर

shukria dharmendra g
Mar 24 (2 days ago)
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amrita

कश्मकश थी कि नज़रों के दायरे बनाता रहा और,
हदें पार करने की शर्त भी लगाता रहा...

ye mere vichar the...jo aapki kavita ne diye...

u wrote really well...:)
all the best...
Mar 25 (1 day ago)
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vijay

aag lagi hai tomar jald bujha de
warna raat yun gujar jayegi aur tu jal jayegaa


aapki kavita bahoot khoob

Chakresh™ Singh


रात यूँ गुजारी शम्मे(*) जलाता रहा बुझाता रहा
तुझे भूलने क़ि कोशिश की तू और याद आता रहा
acha matla hai sir ji....

तन झुलस रहा था मेरा मन झुलस रहा था उसमे
दबी हुई एक आग थी बरसो जिसे बुझाता रहा
waah!
उसमे और मुझमे जाने क्यूँ एक जिद सी लगी थी
मैं दामन से उलझता और वो दामन अपना बचाता रहा
BEST !!![ren]
उसकी दीद की उम्मीद में खड़ा रहा रास्तों पे मैं
जब वो आया सामने नजरे उसी से चुराता रहा
hahaa kya baat hai
ढूँढता कैसे उसे मेरी नजर के भी दायरे थे कुछ
जाने किस धुन में था वो दूर बहुत जाता रहा
again ..wow...bahut khuub sir ji

पुराने रिस्तो की जमीन पर हक दोनों ने अदा किया
वो बेरुखी के बीज बोता मैं प्यार की फसल उगाता रहा
aap to masha allah ho ...ekdum dil jeet liya aaj
लगी थी शर्त उससे हदें पार करने की " तोमर "
वो था की चोट करता रहा मैं था की जख्म खता रहा
hahahaha sahi hai



sir matle mein agar "yaad"ki jageh "satata "word daala jaaye to thoda to aur rhyme mein aaja raha hai...try kar ke dekhiye shayad thik lage


रात यूँ गुजारी शम्मे(*) जलाता रहा बुझाता रहा
तुझे भूलने क़ि कोशिश की तू और याद आता रहा
second line mein kuch change ki gungaaish dikh rah ihai mujhe ..baaki gazal achi hai..
Mar 22 (4 days ago)
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Puja singh

Waah waah !Sir
Mar 22 (4 days ago)
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pratibha

Bahut

Puja singh

Kya baat hai Dr.Sahab!bahut badhiya hai waah waah.......
Mar 24 (2 days ago)
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रजनीश

लगी थी शर्त उससे हदें पार करने की " तोमर "
वो था की चोट करता रहा मैं था की जख्म खता रहा

dr. sab, salam
badhaiyaan.........
Mar 24 (2 days ago)
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unusually busy..

awesome

लगी थी शर्त उससे हदें पार करने की " तोमर "
वो था की चोट करता रहा मैं था की जख्म खता रहा

awesome....sir

bht hi badiya likha hai aapne...
Mar 24 (2 days ago)
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MADHUSUDAN`S

लगी थी शर्त उससे हदें पार करने की " तोमर "
वो था की चोट करता रहा मैं था की जख्म खता रहा

aapke sabad kabhi kabhi dil ko chu jate hai pata nhi kyun bhai
achha likhte ho aur likhte rehna hmmmmmmmmm

chahe kisi ke liye ya apne liye magar likhte rehna
Mar 24 (2 days ago)
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Gurpreet Maan...

रात यूँ गुजारी शम्मे जलाता रहा बुझाता रहा
तुझे भूलने क़ि कोशिश की तू और याद आता रहा

तन झुलस रहा था मेरा मन झुलस रहा था उसमे
दबी हुई एक आग थी बरसो जिसे बुझाता रहा

kya baat ... wht a continuity .... kmaal kr diaa ..


JEO
Mar 24 (2 days ago)
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saurabh anant ,

bahut khoob sir..
Mar 25 (1 day ago)
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Yogita

bahut khoob.. Nice creation

Mar 23 (3 days ago)

Janumanu™

रात यूँ गुजारी शम्मे जलाता रहा बुझाता रहा
तुझे भूलने क़ि कोशिश की तू और याद आता रहा


bhayee bahut khoob matla hai

तन झुलस रहा था मेरा मन झुलस रहा था उसमे
दबी हुई एक आग थी बरसो जिसे बुझाता रहा

dabi aag.......... tan jhulas raha tha ..... thoda connect nahi hua thought
still sher acha hai

उसमे और मुझमे जाने क्यूँ एक जिद सी लगी थी
मैं दामन से उलझता और वो दामन अपना बचाता रहा


thoda sa uljhaa khyaal hai /.....

उसकी दीद की उम्मीद में खड़ा रहा रास्तों पे मैं
जब वो आया सामने नजरे उसी से चुराता रहा

hmm acha hai ...

ढूँढता कैसे उसे मेरी नजर के भी दायरे थे कुछ
जाने किस धुन में था वो दूर बहुत जाता रहा


पुराने रिस्तो की जमीन पर हक दोनों ने अदा किया
वो बेरुखी के बीज बोता मैं प्यार की फसल उगाता रहा

ye bahut kamaal ki baat hai

लगी थी शर्त उससे हदें पार करने की " तोमर "
वो था की चोट करता रहा मैं था की जख्म खiता रहा


bahut acha likha hai
apne likhe kuch sher yaad aye maien collage time main likhe they


sard raatoN mai khud ko garmaata raha
roj hi tera ik khat jalaata raha

kaanto se chudaya gaya na daman
aur phool mujhse daman bachata raha ( ye aapke 3rd sher ko padhke yaad aaya
Mar 24 (2 days ago)
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invisible डॉ. विकास तोमर

shukria janumanu g
Mar 24 (2 days ago)

manjeet

उसकी दीद की उम्मीद में खड़ा रहा रास्तों पे मैं
जब वो आया सामने नजरे उसी से चुराता रहा

ढूँढता कैसे उसे मेरी नजर के भी दायरे थे कुछ
जाने किस धुन में था वो दूर बहुत जाता रहा


yeh kammal hai tomar sir .... best wishes

1 comment:

  1. पुराने रिस्तो की जमीन पर हक दोनों ने अदा किया
    वो बेरुखी के बीज बोता मैं प्यार की फसल उगाता रहा

    Bahut hi sundar abhiwyati hai...padhkar achha laga!

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